भारत के ऐसे डॉक्टर की कहानी जो ईमानदार डॉक्टर होने के बाद देश का सबसे बड़ा सीरियल किलर बन गया

Story of Doctor Devender Sharma in Hindi (Doctor Death)

ये कहानी है देवेंदर शर्मा नाम के ऐसे डॉक्टर की है जिसने अपनी मेडिकल की पढ़ाई खत्म करने के बाद कुछ साल तक तो ईमानदारी से लोगों का इलाज किया लेकिन उसके एक ईमानदार डॉक्टर से Doctor Death बनने की कहानी आप इस ब्लॉग मे जानेंगे।


Story of Doctor Devender Sharma (Doctor Death) in Hindi


देवेंदर शर्मा का जन्म 1958 मे उत्तर प्रदेश के अलीगढ मे हुआ था जिसने 1984 मे बिहार के पटना से Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (B.A.M.S.) मे अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और पढ़ाइ के दौरान 1982 मे ही देवेंद्र शर्मा ने शादी भी कर ली थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद देवेंद्र शर्मा ने राजस्थान जाकर बाँदीकुई में जनता क्लिनिक के नाम से खुद का क्लिनिक चलाने लगा। कई सालों तक सब कुछ सही चल रहा था लेकिन 1994 मे अपना बिज़नेस बढ़ाने के लिए देवेंद्र ने गैस डीलरशिप स्कीम में अपनी पूरी जमापूंजी 11 लाख रूपये लगा दिए लेकिन ये डीलरशिप फ़्रॉड निकली जिससे देवेंद्र शर्मा की सारी जमापूंजी डूब गयी। इस नुकसान को पूरा करने के लिए देवेंद्र वापिस अपने जन्म स्थान अलीगढ वापिस आ गया और उसने खुद की नकली गैस एजेंसी खोली और साथ ही ज्यादा पैसा कमाने के लिए गैरकानूनी किडनी ट्रांसप्लांट करने लगा, इस काम में देवेंद्र की मदद करने वाला डॉक्टर अमित भी शामिल था। देवेंद्र को एक किडनी ट्रांसप्लांट करने के बदले 5-7 लाख रूपये मिलते थे। 

इस काम को अंजाम देने के लिए देवेंद्र और उसकी टीम अलीगढ के सुनसान इलाके में रात के समय एलपीजी सिलिंडर से भरा ट्रक रोकते थे उसके बाद ट्रक ड्राइवर की दोनों किडनी निकाल कर उसकी हत्या कर दी जाती, सिलिंडर को अपने नकली गैस एजेंसी में बेचता और ट्रक को ब्लैक मार्केट में बेच कर पैसे कमाता। हत्या किये गए ट्रक ड्राइवरों की लाश को ठिकाने लगाने के लिए देवेंद्र ने अलीगढ से कुछ दूर कासगंज में मौजूद हजारा नहर को चुना क्यूंकि इस नहर में बहुत से मगरमच्छ मौजूद थे जो इन लाशों को खा जाते थे जिससे देवेंद्र के खिलाफ कोई भी सबूत ही नहीं बचता था।

अब देवेंद्र में पैसों का लालच बहुत बढ़ चूका था और उसे लोगों की हत्या करने में भी मजा आने लगा इसीलिए देवेंद्र ने अब नया प्लान बनाया क्यूंकि एलपीजी ट्रक गायब होने की खबर भी बहुत फ़ैल चुकी थी इसीलिए इस काम में पकड़े जाने का खतरा भी बढ़ गया था। अब नए प्लान में देवेंद्र दिल्ली या जयपुर से कासगंज के लिए टैक्सी बुक करता और हजारा नहर के करीब आकर टैक्सी ड्राइवर की हत्या कर देता और उसके लाश को नहर में फेंक कर उसकी टैक्सी को ब्लैक मार्केट में 20000-25000 तक बेच कर पैसे कमाता। देवेंद्र का गैरकानूनी किडनी ट्रांसप्लांट और ड्राइवरों की हत्या का सिलसिला 2004 तक चला ज़ब 2004 में उसे गुडगाँव हरयाणा से किडनी रैकेट और 6-7 हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया। लेकिन पुलिस भी तब हैरान हो गयी ज़ब पुलिस को दिए गए बयान में देवेंद्र ने बताया की 1994 से 2004 के बीच वह 125 किडनी ट्रांसप्लांट कर चूका है और 50 हत्या तक उसे याद है लेकिन उसके बाद वो अपने हत्याओं की गिनती भूल चूका है। देवेंद्र द्वारा इतनी हत्याओं का पता चलने के बाद ही उसे Doctor Death नाम दिया गया। 2004 में गैरकानूनी किडनी ट्रांसप्लांट और 21 हत्याओं के जुर्म में जयपुर और फरीदाबाद हाई कोर्ट में देवेंद्र शर्मा को उम्र कैद की सजा सुनाई और उसे जयपुर सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया। गुडगाँव कोर्ट में चल रहे नरेश वर्मा नाम के ड्राइवर की हत्या के केस में उसे 2007 में मौत की सजा सुनाई गयी थी लेकिन बाद में इस सजा को भी उम्र कैद में बदल दिया गया।

उम्र कैद की सजा होने के बाद भी देवेंद्र शर्मा की कहानी खत्म नहीं होती क्यूंकि 16 साल जेल में रखने के बाद जनवरी 2020 में 20 दिन के पेरोल में देवेंदर शर्मा को छोड़ा गया लेकिन 20 दिन बाद भी देवेंद्र जेल वापिस नहीं आया। देवेंद्र ने जयपुर से दिल्ली आकर एक विधवा औरत से दूसरी शादी कर ली थी और वहीं रहकर पुलिस को धोखा देते हुए प्रॉपर्टी डीलर का काम करने लगा था लेकिन 7 महीने चली खोज के बाद जुलाई 2020 में पुलिस ने दिल्ली से देवेंद्र शर्मा को दोबारा गिरफ्तार कर लिया।

9 जून 2023 में देवेंद्र शर्मा को फिरसे 2 महीने के पेरोल पर छोड़ा गया लेकिन इस बार भी देवेंद्र शर्मा पेरोल से भाग गया। पुलिस ने अलीगढ गुडगाँव जयपुर हर मुमकिन जगह 2 सालो तक देवेंद्र की तलाश की लेकिन उनके हाथ कोई सुराख़ नहीं लगा और पुलिस देवेंद्र को पकड़ने की उम्मीद छोड़ती जा रही थी। लेकिन 2025 में किसी ने पुलिस को खबर दी की देवेंद्र राजस्थान के Dausa जिले के गुढ़ा कटला गाँव के रामेश्वर धाम मंदिर में पुजारी बन के रह रहा है। पुलिस ज़ब वहाँ पहुंची तो वो इस पुजारी को देखकर हैरान हो गए क्यूंकि वह कोई बूढा आदमी लग रहा था जिसकी लम्बी दाढ़ी और सफ़ेद बाल थे और इस बूढ़े आदमी पुजारी का नाम संत दयादास महाराज था। ये पुजारी बिलकुल भी देवेंद्र शर्मा की तरह लग नहीं रहा था लेकिन पुलिस ने बहुत दिनों तक आसपास के इलाकों में रहकर संत दयादास पर नजर रखी पर उन्हें फिर भी कोई खास सबूत नहीं मिल रहा था। अंत में देवेंद्र शर्मा और संत दयादास के फोटो और वीडियो को आपस में मिलाकर देखा गया और आँखों और नाक की वजह से पता चल गया की की संत दयादास महाराज ही Doctor Death देवेंद्र शर्मा है और मई 2025 में देवेंद्र शर्मा को फिरसे गिरफ्तार किया गया।






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1 टिप्पणियाँ

  1. Isko to mout ki saza de deni chahiye itne logo ki hatya kar ke jel me rakhna ek bahut hi bachkana harkat hai jab hamare desh me hatya karne wale ko turant fasi ki saza na dede ye desh surakchit nhi ho saktamout ke badle mout

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